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ये कहानी एक ऐसी औरत की कहानी है, जो 40 वर्ष की उम्र में विधवा हो गई, जो अपना सब कुछ खो चुकी थी अपना घर, व्यापार और अब पति भी। सारे रास्ते बंद हो चुके थे। हर तरफ अंधेरा, छोटे से शहर में अपने चारों तरह देखने के बाद ये महसूस हुआ, एक अकेली विधवा औरत किसी न किसी का सहारा ही लेती है, चाहे वो मायके वाले हो, ससुराल, बेटा, या फिर कोई,दोस्त बना कर जिन्दगी गुज़ारती है। पर वो किसी का सहारा लेने को तैयार नहीं थी। बस एक ज़िद मुझे जिन्दगी से सब वापस चाहिए। वो खुद से कुछ करना चाहती हूँ। किसी का सहारा नहीं लेना चाहती थी। जिन्दगी का कोई तो मकसद हो। दुनिया के तानों की परवाह न करते हुए,छोटे शहर से उठ कर अकेले ही बड़े शहर में सैटल होने और एक ऐन्टर प्रनोयर बनने के संकट, काफी कठिनाईयों के बाद और इसी फाइटर स्पिरिट के लिए ग्रेट ईन्डियन वुमेन अवार्ड से भी सम्मानित किया गया उसे ॥ ये सुहानी की कहानी है। जो खुश नहीं होते अपनी जिन्दगी से, शिकायत करते हैं, वो भी खुश रह सकते हैं, सब कुछ पा सकते हैं, जो वो चाहते हैं। अगर एक 47 वर्ष की औरत वो कर सकती है तो बाकी सब लोग भी कर सकते हैं ।

Description

ये कहानी एक ऐसी औरत की कहानी है, जो 40 वर्ष की उम्र में विधवा हो गई, जो अपना सब कुछ खो चुकी थी अपना घर, व्यापार और अब पति भी। सारे रास्ते बंद हो चुके थे। हर तरफ अंधेरा, छोटे से शहर में अपने चारों तरह देखने के बाद ये महसूस हुआ, एक अकेली विधवा औरत किसी न किसी का सहारा ही लेती है, चाहे वो मायके वाले हो, ससुराल, बेटा, या फिर कोई,दोस्त बना कर जिन्दगी गुज़ारती है। पर वो किसी का सहारा लेने को तैयार नहीं थी। बस एक ज़िद मुझे जिन्दगी से सब वापस चाहिए। वो खुद से कुछ करना चाहती हूँ। किसी का सहारा नहीं लेना चाहती थी। जिन्दगी का कोई तो मकसद हो। दुनिया के तानों की परवाह न करते हुए,छोटे शहर से उठ कर अकेले ही बड़े शहर में सैटल होने और एक ऐन्टर प्रनोयर बनने के संकट, काफी कठिनाईयों के बाद और इसी फाइटर स्पिरिट के लिए ग्रेट ईन्डियन वुमेन अवार्ड से भी सम्मानित किया गया उसे ॥ ये सुहानी की कहानी है। जो खुश नहीं होते अपनी जिन्दगी से, शिकायत करते हैं, वो भी खुश रह सकते हैं, सब कुछ पा सकते हैं, जो वो चाहते हैं। अगर एक 47 वर्ष की औरत वो कर सकती है तो बाकी सब लोग भी कर सकते हैं ।

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