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लिखना तो काफी पहले शुरू कर दिया था, कलम ने चौदह साल का वनवास गुजारा और तब उसे एक पहचान मिली, संसार के एक कोने से आ रही एक पुकार के रूप में। आज की तारीख में मेरे तीन कहानी संग्रह आपके सामने आ गए हैं और दो कविता संग्रह की शुरुआत मैं पश्चात मेरे हाथ से कर रहा हूँ। मेरी कविताओं के आठ संग्रह तैयार हो गए थे लेकिन मैंने दो-दो संग्रह के एक संग्रह बनाकर उन्हे निकालने की सोची है। पश्चात मेरे हाथ संग्रह को मैं नया या कि पहली रचना नहीं कह सकता, जिस तरह से कहानियों के बारे में कहता हूँ लेकिन इनमे से कई कविताएं एक दौर की शुरुआत जरूर थे, एक धीमी शुरुआत। कविताओं में ये सब लक्षित होता है। ज़्यादातर कवितायें व्यक्ति के लिए हैं कुछ राजनैतिक रंग भी है, महीने भर का राशन जैसी कविताओं मे ये दिखता है। कई कविताओं मे खुद मेरे लिए आश्चर्यजनक है कि विचारों की जबर्दस्त तीक्ष्णता है…ऐसा होता है जब लोग एक क्षण में कई क्षण गुजारते हैं और अपने जीवन के विभिन्न दौरों में मैंने ये खूब किया है। मेरा खुद का सोचना है कि मैं लेखक से पहले कवि रहा हूँ और खुद से आशा करता हूँ कि मेरी कविताएं मेरी उम्मीदें पूरी करें। जीवन के उस महायुग के पश्चात जो मेरे हाथ है वो आपके सामने है।

Description

लिखना तो काफी पहले शुरू कर दिया था, कलम ने चौदह साल का वनवास गुजारा और तब उसे एक पहचान मिली, संसार के एक कोने से आ रही एक पुकार के रूप में। आज की तारीख में मेरे तीन कहानी संग्रह आपके सामने आ गए हैं और दो कविता संग्रह की शुरुआत मैं पश्चात मेरे हाथ से कर रहा हूँ। मेरी कविताओं के आठ संग्रह तैयार हो गए थे लेकिन मैंने दो-दो संग्रह के एक संग्रह बनाकर उन्हे निकालने की सोची है। पश्चात मेरे हाथ संग्रह को मैं नया या कि पहली रचना नहीं कह सकता, जिस तरह से कहानियों के बारे में कहता हूँ लेकिन इनमे से कई कविताएं एक दौर की शुरुआत जरूर थे, एक धीमी शुरुआत। कविताओं में ये सब लक्षित होता है। ज़्यादातर कवितायें व्यक्ति के लिए हैं कुछ राजनैतिक रंग भी है, महीने भर का राशन जैसी कविताओं मे ये दिखता है। कई कविताओं मे खुद मेरे लिए आश्चर्यजनक है कि विचारों की जबर्दस्त तीक्ष्णता है…ऐसा होता है जब लोग एक क्षण में कई क्षण गुजारते हैं और अपने जीवन के विभिन्न दौरों में मैंने ये खूब किया है। मेरा खुद का सोचना है कि मैं लेखक से पहले कवि रहा हूँ और खुद से आशा करता हूँ कि मेरी कविताएं मेरी उम्मीदें पूरी करें। जीवन के उस महायुग के पश्चात जो मेरे हाथ है वो आपके सामने है।

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