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Zindagi – Kabhi Dhoop Kabhi Chaav

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Description

 

साहित्य की बहुत सारी विधाएँ हैं जिनमें कहानी और कविता का प्रमुख स्थान है । जहां कहानी एक बाग़ की तरह है, वहीं कविता उस बाग़ में छटा बिखेरते रंग-बिरंगे फूलों की तरह है । साहित्यकार रूपी बाग़बान दोनों ही विधाओं में अपनी बात कहने की क्षमता रखते हैं और साहित्य को हराभरा और समृद्ध बनाते रहते हैं । प्रस्तुत है आपके सामने एक ऐसा ही बगीचा जिसमें ज़िंदगी के सभी रंग ज़िंदादिली से धड़कते हैं – ज़िंदगी : कभी धूप कभी छांव – जिसमें अपने अहसासों को खूबसूरत शब्दों में पिरोया है इन तेरह रचनाकारों ने :

  1. रंजना बाजपई ( अतिथि विशिष्ट लेखिका )मेरी आंखों की नमी पे, तवज्जो न दो ए दोस्त, अब कर भी गुजरो जो, जी में आता है तुम्हारे…
    2. वंदना सिन्हातेरे मृदु अधरों पर श्वासों की, मदिरमदिर सरगम मचले…
  2. दिलीप मेवाड़ाजाने कब बरस पड़ें सम्हल के रहना, इन बादलों की रगों में चिंगारी है ।
  3. कविता जयंत श्रीवास्तवपतझर यहां पहले आया अनदेखा रहा बसंत, कुछ ऐसी हुई शुरुआत कि पहले आया अंत…
  4. गरिमा मिश्राऔर मुझे अच्छा बनाती हैं, तुम्हारी आंखों की आवाज़, तुम्हारी खामोश मुस्कुराहट…
  5. निधि अग्रवालजिस अग्नि में स्वयं जल कर मैं पीड़ित हुई, उसी अग्नि में औरों को झुलसता देख कर सदैव मेरे अतृप्त मन ने आनंद का अनुभव किया…उफ्फ, कितनी क्रूरता !
  6. प्रीति शर्माआओ हम और तुम, अपने सपनों के तारों को ज़मीं पर टाँक दें, जो मुझे भी पसन्द हैं और तुम्हें                        भी…..
  7. राजसिंह वर्माइस मध्यवर्गीय स्त्री का पूरा संघर्ष दैहिक स्वतंत्रता से लेकर आर्थिक स्वतंत्रता की अवधारणा तक सिमटा हुआ है ।
  8. सोनी केडियातुम्हें व्यक्त करने को, शब्दों को खोजने न जाने मैं, कहाँ- कहाँ जाती हूँ ।
  9. रितु मिश्रावो मोम की तरह पिघल जाती और उसकी सारी शिकायतें, ख्वाहिशें उसकी लौ में जल जातीं । 
  10. राजमतीपोखरना सुराना – रोया बहुत आसमान जब हम तुम से जुदा हुए, बेवफ़ाई तेरी और रिमझिम फुहारों की ये अदाकारी है।
  11. रागिनी श्रीवास्तवाये जो मेरा ‘मैं’, खो गया था, साड़ी की सिलवटों में, पैरों में फैलती दरारों में, रूखे हाथों, और…
  12. राजीव पुंडीर (संपादक)शायद बहुत बड़ा पत्थर था उसके दिल पर जो धीरे-धीरे पिघल कर बाहर आ रहा था ।

 

 

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